खुदको सुधारो - एक कविता। Rectify Yourself - A Poem

 खुदको सुधारो 


खुदको सुधारो  - एक कविता। Rectify Yourself - A Poem


चाहता हूं करने कितना कुछ

 सोचता हूं इतना शिखु, इतना शिखु

 की हर परेशानी खुद निपट सकु।

 पर काम करने का समय, हो नही पाता

 सब कुछ करनेके लिए

 मेरा समय कम परजाता।


सोचता हूं कुछ कुछ छोड़दु

 पर मन नहीं मानता,

 कुछ दिलका करीब है

 तो कुछ है इरादा। 


इसलिए अभी खुद पर फोकस किया हूं 

बेहतर बनना है मुझे,

 बादमे सब करूंगा

 जो करना है मुझे!


एक दिन जरूर आएगा 

जब सफलता कदम चूमेगा मेरा,

 अभी मुझे सिर्फ बेहतर बनना है

 ताकि कर सकूं में वह सब

 जो मुझे करना है।


पढ़िए अगला कविता (झुकु कैसे)
पढ़िए पिछला कविता (उजाला)

खुदको सुधारो  - एक कविता। Rectify Yourself - A Poem


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