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Showing posts from March, 2024

তুমি এসেছো বলে - একটি কবিতা | As You Have Come - A Poem

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তুমি এসেছো বলে তুমি এসেছো বলে  জীবন হয়েছে রঙিন,  তুমি এসেছো বলে  জীবনে ফুটেছে কত ফুল,  তুমি এসেছো বলে  জীবন আমার হয়েছে আনন্দময়,  তুমি এসেছো বলে  জীবনে আমার আর নেই কোনো ভয়,  তুমি এসেছো বলে  এখন আমি পেয়েছি সর্ব সুখ, তুমি এসেছো বলে  আমার চোখে এখন একটিই মুখ! তুমি রয়েছো, রইবে হৃদয় আমার  জুড়ে সারাটা জীবন,  তোমাকে ছাড়া আমার এখন  লাগে না কিছুতে মন!   পড়ুন পরবর্তী কবিতা(আবার শুরু) পড়ুন পূর্ববর্তী কবিতা(স্মৃতি) My Utube Channel My Facebook Page Twitter   Explurger LinkedIn Pinterest   Instagram  

Price of Happiness - A Short Story

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Price of Happiness           "She will never know". It was told by Shib Ram, a neighbor of Mitali, a mad. She was not mad from childhood. She also had a happy family of a husband, Kunal and a son, Lucky. They lived in Rahimpur. It was nearly 15 years ago. Kunal was a hawker. He used to sell mithai to different villages and his income was good. He looked after his family very well. In short, they were very happy.          They built their house in Rahimpur coming from another place. Mitali did not work. She was a housewife. Lucky was really lucky. His every demand was fulfilled. But someone's bad eyes caught their happiness. Everything changed. Kunal suddenly died though he was fit and healthy. He did not have any illness. Yet death took him in its shed and threw Mitali 's family in a very deep pit. Mitali wept bitterly as she lost the one and only support of her family. Then she had to think of the future of her only son. Neighbours did not saw her parents or in-laws.

मेहनत से कामयाबी - एक शायरी | Success From Work - A Shayeri

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  मेहनत से कामयाबी मिलेगा हर वह खुशियां  जो तुझे चाहिए, मिलेगा हर वह खुशियां  जो तुझे चाहिए,  बस हौसला मत हार और काम करते जा  फिर देख क्या कमाल का होता है नतीजा। परिये अगले शायरी परिये पिछले शायरी My Utube Channel My Facebook Page Twitter   Explurger LinkedIn Pinterest   Instagram  

सहनशक्ति - एक कविता। Endurance - A Poem

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 सहनशक्ति कभी सोचाना तुझे यह मिलेगा,  अच्छेपन का ऐसा कीमत देना पड़ेगा, जिंदगी होगा नरक जैसा  पर सब कुछ तुझे सहना पड़ेगा  टुटता है तो वह लोग  जिनका क्या काबिलियत नहीं होता! तु अलग है, टुट मत  जारी रख तेरा मेहनत। यह दुनिया अलग है  क्योंकि, इसे इंसान ने बनाया है,  यहां पैसा ही सब कुछ है  पैसा के पिछे ही सब दौड़ते हैं  इंसानियत का कोई कीमत नहीं  भगवान भी यहां घूस लेता है!  तू गलत समय पर धरती पर आया  जानवरों को बीच इंसान बना,  तेरा कीमत वह क्या समझेगा  उन्हें तो सिर्फ चाहिए पैसा! सब कहता है समय के साथ चल  पर, मैं कहता हूं इंसानियत लेकर चल,  भले जमाना तेरा बुड़ा करें  रास्ता तेरा हो कांटे से भरे,  पर मिलेगा तुझे सुकून  जो नसीब नहीं होता है उन सबको,  जो बन ना सके इंसान।                                         Sushanto Basak   परिये अगले कविता परिये पिछले कविता ( कैसी आजादी) My Utube Channel My Facebook Page Twitter   Explurger LinkedIn Pinterest   Instagram  

স্মৃতি-একটি কবিতা | Memory - A Poem

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স্মৃতি  পুরনো সেই দিনগুলো  কোথায় গেলো হায়,  ও সে ফাঁকি দেওয়া  ইয়ার্কি করা, তা কি ভোলা যায়! শুরু থেকেই দিনগুলো সব  স্বপ্নের মত ছিল,  হঠাৎ করে ঘুমটা যেন  আমার ভেঙে গেলো!  দু বছরের ঘুমখানি কি  হঠাৎ ভেঙে যায়,  ও সে ফাঁকি দেওয়া  ইয়ার্কি করা  তা কি ভোলা যায়! অন্ধকার নিয়ে আসে  স্মৃতির পাতায় রয়ে যারে আনন্দের সেই দিন!  ক্লাস ঘর, কলেজের মাঠ কিম্বা ক্যান্টিন  সব জায়গাতেই ছিল যেন  আনন্দের ছোঁয়া,  যাবে না তো দিনগুলোকে  কোনদিন ভোলা! পরুন পরবর্তী কবিতা (তুমি এসেছো বলে) পরুন পূর্ববর্তী কবিতা (জীবন শিক্ষা) My Utube Channel My Facebook Page Twitter   Explurger LinkedIn Pinterest   Instagram  

Natural Justice - A Short Story

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Natural Justice        "She is doing penance", said Deben, a man of 39 years. He said this about a woman whose name was Debi. She was of 80 years old. Tarutola was her village which was nearly 50 Km away from the town Simakha. Debi was born in the year 1253 AD in a village called Shantipur. When she was of 12 years, she was married to Bikash who lived in Tarutola. After marriage, Bikash'  parents suddenly died. No one suspected anything.        Within few years Bikash and Debi had two sons and two daughters.Debi had now bad reputation in her village. She used to go to others' house while they were cooking meals. They used to say that though they could cooked rice in a large pot, they could not get enough to eat when Debi came to their house during cooking. But Debi cooked in a small pot and got enough for her family. The villagers knew that Debi  practised sorcery, yet they could not tell her anything in fear of much danger. They tried to avoid her.         Days passe