तकलीफ - एक कविता। Pain - A Poem

 तकलीफ 


तकलीफ - एक कविता। Pain - A Poem


जितना सहोगे उतना मिलेगा 

कुछभी बेकार नहीं जाता, 

 आज तकलीफ है तो कल खुशी मिलेगा 

पर आज तुम्हें सहना पड़ेगा!


तकलीफ लेकर आता है खुशी का पैगाम

 पर हम सिर्फ देखते हैं गम,

गम ही नहीं सहोगे तो

 खुशी कैसे मिलेगा,

 खुशी गमके बगैर नहीं रहता।

 

अगली बार अगर गम आए

 तो समझ लेना कुछ अच्छा होने वाला है,

गम लेकर आया है वह पैगाम

 होने वाला है अच्छा इसका अंजाम।

 

कहावत है, "जो पत्थर

 छेनी-हातुरी के दर्द नहीं सह सकता

 वह कभी मूरत नहीं बन सकता"।

हमारा जिंदगी भी ऐसा है 

हमें अगर तकलीफसे डर लगे

 तो हम नहीं बढ़ सकते आगे।


इसलिए हिम्मत से तकलीफ झेलो,

 इससे प्यार करो,

याद रखो आज जितना तकलीफ झेलोंगे 

कल उतना ज्यादा खुशी पाओगे।


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