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अकेले चल - एक कविता। Live Alone - A Poem

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  अकेले चल  अगर कुछ बनना चाहते हो  तो आज से अकेले चलो,  बुड़ा संगत, बुरा इंसान  तुम्हें आगे चलने नहीं देगा  वह सिर्फ तुम्हें करेगा परेशान! इस दुनिया में कोई  किसी का दोस्त नहीं है,  हर कोई अपने में मगन है  अपनापन हीं उनके सबसे आगे है।  जब आएगा मौका  वह छोड़ देंगे साथ,  इसलिए अभी से ही सुधर जाओ  मत सुनो किसी का बात! जमाना जालिम है  वह तुम्हें आगे बढ़ने नहीं देंगे, हर कोशिश करेंगे वह  तुम्हें नीचे गिरने के लिए!  इसलिए कभी मत बताओ  तुम्हारा लक्ष्य क्या है,  तुम क्या कर रहे हो  तुम्हारा जीवन में क्या चल रहा है! तुम्हें चुप देख के  जालिमों मे पर जाएगा हलचल, बुरा इंसान से दूर रह  आज से ही तु अकेले चल! पड़िए अगला कविता (बदलता वक्त) पड़िए पिछला कविता (धोखा)